वर्तमान परिदृश्य में हिंदी भाषा की सही परिभाषा क्या है? क्या हिंदी को ग्लैमर स्वरूप दिया जा सकता है?

Beautiful Hindi Fonts

हिंदी, देवनागरी लिपि में लिखी जाने वाली सबसे प्रचलित भाषा, दुनिया में मैंडरिन, स्पेनिश और इंग्लिश के बाद सबसे ज्यादा उपयोग में लायी जाती है| भारतीय उप-महादीप में हिंदी भाषियों की संख्या को देखते हुए भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३४३(१) में हिंदी को आधिकारिक भाषा का दर्जा दिया गया है|

आज भले ही लोग कहैं कि भारतीय युवा पाश्चात्य संस्कृति की और झुक रहा है, परन्तु ये केवल एक ही पहलु है| युवाओ में भारतीय संस्कृति की ओर पहले से ज्यादा झुकाव देखने में आ रहा है| भारतीय संस्कृति खासकर लोक कलाओ और हिंदी बोलने और सीखने पर जोर दिया जा रहा है| अभी कुछ दिन पहले इंटरनेट पर एक वीडियो देखा , उसमें पहले कुछ युवाओं से अंग्रेजी वर्णमाला के अक्षर पूछे जाते है जो की वो लोग एक बार में ही पूरे बोल देते हैं, फिर उनसे हिंदी वर्णमाला के अक्षर बताने को बोला जाता है, तब उनको हिंदी खरी के एक दो लाइन से ज्यादा अक्षर याद ही नहीं आते| देखने वाली बात ये नहीं, परन्तु ये है की जब वो हिंदी के अक्षर नही बता पाते तो उनकी आँखों में वो शर्म और अफ़सोस दिखता है जो दर्शाता है की आज के युवा आखिर चाहते क्या हैं| युवा चाहते तो हैं की हिंदी बोले, हिंदी पढ़ें, परन्तु आजकल की व्यावसायिक शिक्षा पद्धति ही जोर देती है विदेशी भाषाओँ के इस्तेमाल पर| एक तो हिंदी दूसरी  भाषाओँ से ज्यादा कठिन और ज्यादा शब्दावली वाली है ऊपर से उनको बचपन से ही विदेशी बनाने पर जोर दिया जा रहा है|

“वर्तमान परिदृश्य में कहा जाये तो हिंदी की स्थिति उस गरीब लाचार के भाँती है जिसे देखकर लोग उसकी सहयता को आगे तो आना चाहते है पर समयाभाव के कारण बिना मदद किये अपनी रोज़ी-रोटी कमाने सामने से निकल जाते हैं|”

ऐसी समस्या को केवल एक ही चीज़ से हल किया जा सकता है, वो है हिंदी को अपग्रेड किया जाये, ध्यान देने की बात है की अगर में यहाँ “अपग्रेड” की जगह “उन्नयन” लिखता तो शायद लोगों को शब्दकोष की जरूरत पड़ती, जिसमें हिंदी भाषी लोग ही ये ढूंढते की इस शब्द को आखिर कहते क्या हैं|

ऐसा नहीं है की भाषाओ को पहले नहीं मिलाया गया, अंग्रेजी को ही देखिये उसमें फ्रेंच, स्पेनिश, लैटिन इंग्लिश, जर्मन आदि अनेक भाषाओ का मिश्रण है, यही कारण है की ये ज्यादा प्रचलन में आ रही है| अगर आज हम हमारे राष्ट्रीय गान के रचियता रविंद्रनाथ टैगोर जी की ही अंग्रेजी की कविताओ को पढ़ें तो आज समझ नहीं आएगी फिर अंग्रेजी कवियों को तो छोड़ ही दो|

हिंदी को ग्लैमर का रूप दिया ही जाना चाहिए| यहाँ ग्लैमर को फैशन जगत से न जोड़ा जाये, इसका सीधा मतलब ये होना चाहिए की हिंदी का वर्तमान समयानुसार वभिन्न भाषाओ के साथ तालमेल होना चाहिए| हिंदी में प्रचलित शब्द जोड़े जाये और हिंदी साहित्य में विभिन्न प्रयोग किये जाये जिससे इसको परखा जा सके कि हिंदी को कितना ग्लैमरस बनाया जा सकता है जिससे हिंदी का प्रयोग भी बढे और इसका अस्तित्व खतरे में न पड़े|

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